Tuesday, 25 August, 2026г.
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Brahman aur vaishya ki kahani A STORY OF BRAHMN AND STREETWALKER

Brahman aur vaishya ki kahani A STORY OF BRAHMN AND STREETWALKERУ вашего броузера проблема в совместимости с HTML5
एक साधारण ब्राह्मण थे | वे काशी पढ़कर आये | सिर पर पुस्तकें लदीं हुईं थीं | शहर से होकर निकले तो वर्षा आ गयी | पास में छाता था नहीं | अत; एक मकान के दरवाजे के पास जगह देखकर खड़े हो गये | उसके ऊपर एक वेश्या रहती थी | कुछ आदमी ‘रामनाम सत्य है’ कहते हुए एक मुर्दे को लेकर वहाँ से निकले | उस वैश्या ने आवाज देकर एक लड़की से कहा कि जा, पता लगाकर आ कि यह स्वर्ग में गया या नरक में गया ? लड़की चली गयी | पण्डितजी ने सुना तो वे भी वहीं ठहर गये कि ऐसी कौन- सी विद्धा है, जिससे मरने वाले का पता लग जाय कि वह कहाँ गया ? थोड़ी देर में वह लड़की आयी और वैश्या से बोली यह तो नरकों में गया | इतने में दूसरा मुर्दा आया तो वेश्या ने फिर लड़की को भेजा | लड़की ने आकर कहा यह तो स्वर्ग में गया | पण्डितजी ने विचार किया कि में इतने वर्ष काशी रहा, वहाँ कितनी पुस्तकें पढ़ी, पर यह पता नहीं लगता कि मरने वाला कहाँ गया ? यह विद्धा तो मेरे को सीखनी चाहिए | पण्डितजी मकान के ऊपर चले गये | वेश्या ने देखा तो पहचान लिया कि यह मेरा ग्राहक तो है नहीं | वेश्या ने पण्डितजी से पूछा, आप यहाँ कैसे आये ? अपने आने का कारण बताओ | पण्डितजी बोले – माताजी ! जैसे ही पण्डितजी ने माता जी कहा, वेश्या एकदम से बोल उठी – मेरे को माताजी मत कहो में तो एक वेश्या हूँ | पण्डितजी बोले हमारे लिए तो माँ, बहन या बेटी ही हो ! वेश्या बोली– क्या बात है ? पण्डित जी ने कहा—तुमने लड़की से कहा कि पता लगाकर आओ, मरने वाला कहाँ गया तो उसने आकर कहा कि एक नरक में गया और एक स्वर्ग में गया, यह क्या विद्धा है ? में जानना चाहता हूँ | वेश्या ने उस लड़की को बुलाया और कहा कि महाराज को बता तूने कैसे पता लगाया कि ये नरक में गया और ये स्वर्ग में गया | वह कहने लगी महाराज ! वे मुर्दा लिए जा रहे थे मेंने उनसे पूछा कि यह कहाँ से आया है, किस मोहल्ले का है ? फिर में पता लगाकर उस मोहल्ले में पहुँची तो लोगों को रोते देख कर पता लगा कि इस घर का आदमी मर गया| उनके पड़ोसियों के घर जाकर सुना तो लोग कह रहे थे कि वह आदमी मर गया तो हम निहाल हो गये ! वह सबकी चुगली करता था, चोरी करा देता था, लड़ाई करा देता था, झूठी गवाही देकर फँसा देता था, बहुत दुख देता था | मर गया तो बहुत अच्छा हुआ, आफत मिटी ! ऐसी बातें मैंने कई घरों में सुनीं तो आकर कहा कि वह नरकों में गया | दूसरा मुर्दा आया तो उसका भी पता लगाने में उसके मोहल्ले में गयी | वहाँ लोग बातें कर रहे थे कि राम-राम, गजब हो गया ! वह आदमी तो हमारे मोहल्ले का एक प्रकाश था | वह सन्त-महात्माओं को बुलाया करता था, सत्संग कराता था, कोई बीमार हो जाय तो रातों जगता था, किसी पर कोई आफत आती तो तन- मन- धन से सहायता करता था | वह चला गया तो हमारे मोहल्ले में अँधेरा हो गया | ऐसी बातें सुनीं तो आकर कहा कि वह स्वर्ग में गया | पण्डित जी बोले—अरे ! ये बातें तो हमारी पुस्तकों में भी लिखीं हैं कि अच्छे काम करने वाले की सद गति होती है और बुरे काम करने वाले की दुर्गति होती है, पर यह बात हमारी अक्ल में ही नहीं आयी| #PRAVEENAWASTHI #GYANKIBATE
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