Kavya Cafe: रावण | Spoken poetry by Pragya Nema | Amar Ujala Kavya
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ये है अमर उजाला की बेहद खास पेशकश- काव्य कैफे।
युवा कवि, युवा कविता...यानी वो बतकही जो आज की जुबान में आज की मिसालों से कही जाए। जो धड़कती लगे। कोई अजनबीपन नहीं। जिसमें इस दौर की खुशबू हो, इस दौर के संघर्ष हों जिसमें हम जी रहे हैं। जिसे शब्दों में पिरोया जाए और यही युवा उसे अभिव्यक्त करें।
हम हर पखवाड़े लेकर आएंगे कुछ कवियों को जो आपकी जुबां में आपसे करेंगे ढेरों बातें।
कविता प्रेमियों के लिए एक अनोखा मंच जहाँ आप पढ़ भी सकते अपने प्रिये कवियों को और लिख भी सकते हैं कविताएँ- https://www.amarujala.com/kavya
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