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Radha Rani bhajan
सखी री बरसाने में आज लाड़ली प्यार लुटाती है
गुणो की बात ना पूछो अवगुणो पे रीझ जाती है
ना जाने क्या भरा जादू है इनके नयन कमलों में
निहारे कोर करुणा की झोलियाँ भर भर जाती हैं
विराजे ऊँची अटारी पर खोल करुणा की पिटारी को
जिन्हें दुनिया ठुकराती है ये सीने से लगाती है
दया की सिंधु है श्यामा कृपा की खान है प्यारी
जिनके ऊपर ये बरसे उन्हें बरसाना बुलाती है
कहाँ मेरी लाड़ली श्यामा कहाँ औक़ात है मेरी
कभी ये दोष ना देखे तभी तो भक्तों को भाती है