शांतिकुंज पहुँचे 18 राज्यों के मेधावी विद्यार्थी
कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने किया पुरस्कृत
हरिद्वार, 22 मई।
दिल्ली, गुजरात, हिमाचल, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडू, मप्र, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखण्ड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित 18 राज्य में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में प्रावीण्य सूची में आये विद्यार्थी शांतिकुंज पहुँचे। ये विद्यार्थी कक्षा पाँच से महाविद्यालय स्तर पर अपने-अपने वर्ग में प्रांतीय स्तर पर सर्वोच्च अंक प्राप्त किये हैं। पाँच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण एवं पुरस्कार शिविर के दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या जी ने प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न एवं नगद राशि भेंटकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मेधावी बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या ने कहा कि मन को एकाग्रचित कर कार्य करने से सफलता अवश्य मिलती है और उसे एकाग्र करने के लिए गायत्री मंत्र का जप एक सुंदर उपाय है। गायत्री मंत्र जप अर्थात् सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री माता गायत्री की उपासना है। नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जप करने से मन में शांति के साथ एकाग्रता बढ़ती है और तन भी बलिष्ठ होता है। तन और मन के सुदृढ़ होने से इच्छित लक्ष्य तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि विदेशी बच्चों ने भी गायत्री मंत्र जप करना प्रारंभ किया है, और उन्हें अच्छी सफलता भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मानवता को समर्पित संस्कृति है। इसका उद्देश्य मनुष्य के अंदर निहित श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों से अवगत कराना है और इस दिशा में अखिल विश्व गायत्री परिवार के लाखों स्वयंसेवक सार्थक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में जो संस्कृति के बीज बोये जा रहे हैं, यही आगे चलकर वटवृक्ष के रूप में विकसित होकर राष्ट्र के विकास में सहयोग प्रदान करेंगे। इस अवसर पर डॉ. ओपी शर्मा, श्री कालीचरण शर्मा, श्री प्रदीप दीक्षित, डॉ. पी.डी. गुप्ता सहित पाँचों राज्यों के मेधावी छात्र-छात्राएँ एवं उनके अभिभावक व शिक्षक उपस्थित रहे।
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