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तरबूज का महत्व व किस्मों की जानकारी |
उन्नत किस्में :
चार्लेस्टन ग्रे : इसके फल बड़े आकार के, भूरे, लाल गुद्दे और कम बीजों वाले होते हैं | इसकी औसत पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ है |
शुगर बेबी : यह देश के तरबूज उगाये जाने वाले समस्त क्षेत्रों के लिए अनुमोदित किस्म है | इसके पत्ते गहरे कटाव व उभार वाले होते हैं | फल माध्यम से छोटे आकार के गोग, गहरी हरी छाल व हलकी महसूस होती धारियों वाले, 3-5 kg वजन के होते हैं | गूद्दा गहरा लाल, बारीक बनावट वाला तथा बहुत मीठा होता है | बीज छोटे भूरे और काली नोक वाले होते हैं | इसकी औसत पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ है |
भूमि की तैयारी : तरबूज को लगभग सभी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है लेकिन इसके लिए दोमट भूमि सबसे उपयुक्त है, जिसमे जल निकास की सुविधा अच्छी हो | भूमि की तैयारी के समय गोबर की खाद मिलायें व खेत की 3-4 बार जुताई करके सुहागा लगायें |
बीजाई का समय : फरवरी का प्रथम सप्ताह बीजाई के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है लेकिन बीजाई तापमान पर निर्भर करती है | अंकुरण के लिए 24 से 29 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त है |
बीज की मात्रा : एक एकड़ के लिए 1kg बीज प्रयाप्त रहता है |
बिजाई की विधि : तरबूज की बीजाई 2m चौड़ी क्यारियों में नाली के किनारों पर करनी चाहिए | पौधे से पौधे का अंतर 60 cm रखें | एक स्थान पर 2-3 बीज बोयें | बाद में एक स्थान पर एक ही पौधा रखें |
खाद व उर्वरक :
गोबर की खाद - 6 टन , नाइट्रोजन - 20 kg, फॉस्फोरस - 10 kg और पोटाश - 10 kg | बीजाई के समय फॉस्फोरस व पोटाश की साड़ी मात्रा तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा डालनी चाहिए | शेष नाइट्रोजन को कड़ी फसल में दें |
सिंचाई : बीजाई बत्तर में करें और बीजाई के बाद एक हलकी सिंचाई अवश्य करें | अंकुरण के बाद 5-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें | नाइट्रोजन की मात्रा डालने के बाद सिंचाई अवश्य करें | फलों के पकाने पर सिंचाई बंद कर दें |
फलों की तोड़ाई व पैदावार : फलों का रंग पीला होने पर इसकी तुड़ाई करें लेकिन फलों की तुड़ाई व पैदावार किस्म पर निर्भर करती है |