Asaram Bapu ji - Manah Sharir Ka Samarthya (मनःशरीर का सामर्थ्य ) | Durlabh satsang
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परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की अमृतवाणी
सत्संग के मुख्य अंश :
* मन:शरीर के संकल्प की दृढ़ता से योगी एक में से अनेक हो जाता है ....श्री कृष्ण ने १६१०८ रूप धारण किये .....
* पूज्य गुरुदेव के मित्र संत के जीवन की घटना .....बंद मंदिर में प्रकट हुए संत ....
*हमारे मन की अगर मन मानी होती है तो स्थूल होने लगता है ....अंदर से कंगाल होने लगता है ....और व्यक्ति गुलाम हो जाता है परिस्थितियों का ........चित्त की वृत्ति को सूक्ष्म करने से आपका सामर्थ्य , आपकी समझ बदती है ..
* जप ध्यान करने से अपने रक्त के कण भी पवित्र होते हैं , और अपना मन भी पवित्र होता है , जिससे आप किसी बाहर के अटैक से भी बच सकते हैं ....
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